पोल्ट्री में फाउल पॉक्स (Fowl Pox)
पोल्ट्री में फाउल पॉक्स (Fowl Pox)
व्यावहारिक जानकारी एवं फार्म कार्य
At a Glance
- गंभीरता का स्तर: High
- मुख्य रूप से प्रभावित: सभी आयु वर्ग
- फैलने का मार्ग: काटने वाले कीड़ों (मच्छरों) द्वारा यांत्रिक प्रसार, सीधा संपर्क, त्वचा की रूसी/डैंडर को सांस के जरिए अंदर लेना
What You May Notice
- शुरुआती लक्षण: धीरे-धीरे फैलना
- गंभीर लक्षण: क्यूटेनियस (सूखा): कलगी, गलकंबल (वॉटल) और टांगों पर गांठदार घाव जो पीले छालों और फिर गहरे रंग की पपड़ी में बदल जाते हैं। डिप्थीरिटिक (गीला): मुंह और ग्रासनली (एसोफैगस) के म्यूकोसा पर उभरे हुए पीले, पनीर जैसे स्यूडोमेम्ब्रेनस चकत्ते।
- पोस्टमॉर्टम निष्कर्ष: म्यूकोसा से मजबूती से चिपकी हुई फाइब्रोनिक्रोटिक झिल्लियां (जिन्हें हटाने पर खून बहने वाले छाले/घाव बन जाते हैं)।
Why It Matters
- मृत्यु दर: < 1% (क्यूटेनियस/सूखा रूप); 50% तक (दम घुटने के कारण डिप्थीरिटिक/गीले रूप में)
- आर्थिक जोखिम: मध्यम से उच्च
Field Verification Checkpoints
- फील्ड सत्यापन (जांच): पंख रहित त्वचा पर विशिष्ट पपड़ी, या मुंह में पनीर जैसे चकत्ते
- प्रयोगशाला पुष्टि: हिस्टोपैथोलॉजी (इओसिनोफिलिक इंट्रासाइटोप्लास्मिक बॉलिंगर बॉडीज के साथ एपिथेलियल हाइपरप्लासिया), कोरियोएलेंटोइक मेम्ब्रेन (CAM) पर वायरस आइसोलेशन (पॉक घाव), PCR
- अन्य संभावनाएं: संक्रामक लैरींगोट्रैकियाइटिस (Infectious Laryngotracheitis), कैंडिडायसिस (Candidiasis)
Prevention & Control Action
- टीकाकरण नियंत्रण: Hatchery standard or field boosting
- बायोसिक्योरिटी कार्रवाई: Vector Control (Larvicides, Mosquito screening)
Identity (Identity)
पोल्ट्री को प्रभावित करने वाली एक धीमी गति से फैलने वाली, डबल-स्ट्रैंडेड डीएनए वायरल संक्रामक बीमारी। यह एपिथेलियल हाइपरप्लासिया पैदा करती है, जिसके परिणामस्वरूप त्वचा पर गांठदार पपड़ी (सूखा रूप/ड्राई फॉर्म) या डिप्थीरिटिक चकत्ते (गीला रूप/वेट फॉर्म) बनते हैं, जो मुख्य रूप से त्वचा (इंटेगुमेंटरी) और ऊपरी श्वसन प्रणाली को लक्षित करते हैं।
Overview (Overview)
फाउल पॉक्स (Fowl Pox) एक वायरल संक्रामक रोगज़नक़ है जो गर्म और आर्द्र (नमी वाले) क्षेत्रों में अधिक फैलता है जहां काटने वाले कीट (मच्छर) आम होते हैं। यह बड़ा डीएनए वायरस साइटोप्लाज्म में अपनी संख्या बढ़ाता है, जिससे एपिथेलियल कोशिकाओं की असामान्य वृद्धि (हाइपरप्लासिया) होती है और इओसिनोफिलिक बॉलिंगर बॉडीज (Bollinger bodies) बनती हैं। यह बीमारी दो रूपों में दिखाई देती है: क्यूटेनियस (पंख रहित त्वचा पर पपड़ी/गांठें) और डिप्थीरिटिक (मुंह और स्वरयंत्र/लैरिंक्स में पनीर जैसे चकत्ते)। हालांकि सूखे रूप में मृत्यु दर कम होती है, लेकिन गीला रूप सांस रुकने (दम घुटने) के कारण मौत की वजह बन सकता है। रोकथाम के लिए कीट नियंत्रण (लार्वानाशक, जालीदार शेड) और विंग-वेब पंचर (पंख की झिल्ली में छेद) के माध्यम से दिए जाने वाले लाइव एटेन्यूएटेड फाउल पॉक्स एम-स्ट्रेन / पिजन पॉक्स टीकों का उपयोग किया जाता है।
Structured Facts (Structured Facts)
Classification (Classification)
वायरल > संक्रामक रोगज़नक़ (Infectious Pathogen)
Epidemiology (Epidemiology)
- भारत में प्रसार: गर्म और आर्द्र क्षेत्रों में स्थानिक (एंडेमिक)
- गंभीरता: मध्यम
- प्रभावित प्रजातियां: पोल्ट्री (बढ़ती हुई पुलेट्स, लेयर्स, देसी/बैकयार्ड मुर्गियां)
- प्रभावित आयु: सभी आयु वर्ग
- संचरण (Transmission): काटने वाले कीड़ों (मच्छरों) द्वारा यांत्रिक प्रसार, सीधा संपर्क, त्वचा की रूसी/डैंडर को सांस के जरिए अंदर लेना
- मौसमी प्रभाव: गर्म और आर्द्र महीनों में अधिक प्रकोप (मच्छरों का मौसम)
- मृत्यु दर (Mortality): < 1% (क्यूटेनियस/सूखा रूप); 50% तक (दम घुटने के कारण डिप्थीरिटिक/गीले रूप में)
- रुग्णता दर (Morbidity): कीटों की संख्या के आधार पर 10% से 100%
- आर्थिक महत्व (Economic Importance): मध्यम से उच्च
क्लिनिकल संकेत (Clinical Signs)
- शुरुआती/मध्यम चरण: धीरे-धीरे फैलना
- गंभीर चरण: क्यूटेनियस (सूखा): कलगी, गलकंबल (वॉटल) और टांगों पर गांठदार घाव जो पीले छालों और फिर गहरे रंग की पपड़ी में बदल जाते हैं। डिप्थीरिटिक (गीला): मुंह और ग्रासनली (एसोफैगस) के म्यूकोसा पर उभरे हुए पीले, पनीर जैसे स्यूडोमेम्ब्रेनस चकत्ते।
- पोस्टमार्टम निष्कर्ष: म्यूकोसा से मजबूती से चिपकी हुई फाइब्रोनिक्रोटिक झिल्लियां (जिन्हें हटाने पर खून बहने वाले छाले/घाव बन जाते हैं)।
Diagnosis (Diagnosis)
- फील्ड डायग्नोसिस: पंख रहित त्वचा पर विशिष्ट पपड़ी, या मुंह में पनीर जैसे चकत्ते
- प्रयोगशाला परीक्षण: हिस्टोपैथोलॉजी (इओसिनोफिलिक इंट्रासाइटोप्लास्मिक बॉलिंगर बॉडीज के साथ एपिथेलियल हाइपरप्लासिया), कोरियोएलेंटोइक मेम्ब्रेन (CAM) पर वायरस आइसोलेशन (पॉक घाव), PCR
- डिफरेन्शियल डायग्नोसिस: संक्रामक लैरींगोट्रैकियाइटिस (Infectious Laryngotracheitis), कैंडिडायसिस (Candidiasis)
इलाज (Treatment)
- तत्काल कार्रवाई: वैक्टर (मच्छर/कीट) नियंत्रण
- दवाएं: कोई दवा उपलब्ध नहीं
Prevention (Prevention)
- टीकाकरण: फाउल पॉक्स एम-स्ट्रेन या पिजन पॉक्स लाइव एटेन्यूएटेड वैक्सीन (8-10 सप्ताह की उम्र में विंग-वेब पंचर द्वारा, या उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में एक दिन के चूजे को)
- बायोसिक्योरिटी (Biosecurity): मानक बायोसिक्योरिटी प्रोटोकॉल द्वारा बचाव, काटने वाले कीड़ों का नियंत्रण, जालीदार शेड, जमा पानी को हटाना, लार्वानाशक का छिड़काव
- फार्म प्रबंधन: अधिक भीड़भाड़ और अत्यधिक तापमान को कम करें (जो बीमारी को और गंभीर बनाते हैं)
Quantitative Data (Quantitative Data)
- Morbidity Rate (Morbidity Rate): 10% से 100%
- Mortality Rate (Mortality Rate): < 1% (सूखा रूप), 50% तक (गीला रूप)
- वैक्सीनेशन उम्र (Vaccination Age): 8 से 10 सप्ताह
Relationships (Relationships)
- Vaccines (Vaccines): फाउल पॉक्स एम-स्ट्रेन (Fowl Pox M-Strain), पिजन पॉक्स (Pigeon Pox)
- Medicines (Medicines): कोई नहीं
- बायोसिक्योरिटी (Biosecurity): वैक्टर कंट्रोल (लार्वानाशक, मच्छर-रोधी जाली)
- रोग बढ़ाने वाले कारक (Predisposing Factors): अधिक भीड़भाड़, उच्च तापमान
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