पोल्ट्री में फैटी लिवर हेमोरेजिक (Fatty Liver Hemorrhagic)
पोल्ट्री में फैटी लिवर हेमोरेजिक (Fatty Liver Hemorrhagic)
व्यावहारिक जानकारी एवं फार्म कार्य
At a Glance
- गंभीरता का स्तर: High
- मुख्य रूप से प्रभावित: पीक उत्पादन पार कर चुकी लेयर मुर्गियां (35 सप्ताह से अधिक की उम्र)
- फैलने का मार्ग: गैर-संक्रामक
What You May Notice
- शुरुआती लक्षण: पक्षियों का अधिक वजन होना, कलगी का पीला पड़ना
- गंभीर लक्षण: बिना किसी पूर्व चेतावनी संकेत के अचानक मृत्यु। प्रजनन, हृदय और लिवर प्रणाली को लक्षित करता है।
- पोस्टमॉर्टम निष्कर्ष: पेट की गुहा (एब्डोमिनल कैविटी) में जमे हुए खून के बड़े थक्के मिलना। लिवर का बड़ा, पीला-हल्का, नरम, चिकना और नाजुक होना तथा सबकैप्सुलर स्तर पर व्यापक रक्तस्राव। पेट में भारी मात्रा में चर्बी (फैट) का जमाव।
Why It Matters
- मृत्यु दर: 3% से 5% (गर्मियों में 10% तक); पिंजरे में कुल मौतों का 74% तक कारण बनता है
- आर्थिक जोखिम: गैर-संक्रामक मृत्यु दर का प्रमुख कारण
Field Verification Checkpoints
- फील्ड सत्यापन (जांच): भारी लेयर मुर्गियों की अचानक मृत्यु; लिवर से आंतरिक रक्तस्राव
- प्रयोगशाला पुष्टि: लिवर में लिपिड सामग्री का विश्लेषण; हिस्टोपैथोलॉजी में व्यापक फैटी इनफिल्ट्रेशन और ऊतकों की संरचना में टूट-फूट दिखना
- अन्य संभावनाएं: इंक्लूजन बॉडी हेपेटाइटिस, लिम्फॉइड ल्यूकोसिस
Prevention & Control Action
- टीकाकरण नियंत्रण: Hatchery standard or field boosting
- बायोसिक्योरिटी कार्रवाई: लागू नहीं
Identity (Identity)
आहार में अत्यधिक ऊर्जा (कैलोरी) और सीमित शारीरिक गतिविधि के कारण पिंजरों (केज) में रहने वाली लेयर मुर्गियों में होने वाला एक गैर-संक्रामक मेटाबॉलिक विकार। बड़े पैमाने पर डी नोवो लिपोजेनेसिस (फैट का निर्माण) के कारण लिवर में वसा जमा हो जाती है, जिससे लिवर की संरचना कमजोर हो जाती है और अंततः पेट के दबाव से लिवर फट जाता है और जानलेवा रक्तस्राव (हेमरेज) होता है।
Overview (Overview)
फैटी लिवर हेमोरेजिक सिंड्रोम (FLHS) केज लेयर फार्मों में गैर-संक्रामक मृत्यु दर का एक प्रमुख कारण है। एस्ट्रोजन हार्मोन अंडे की जर्दी (यॉक) बनाने के लिए लिवर में लिपिड निर्माण को उत्तेजित करता है, लेकिन आहार में अत्यधिक कार्बोहाइड्रेट और शारीरिक गतिविधि की कमी लिवर पर अतिरिक्त भार डालती है। शुष्क पदार्थ (ड्राई मैटर) के आधार पर लिवर में फैट की मात्रा 70% तक पहुंच सकती है, जिससे अंग बेहद नाजुक व भुरभुरा हो जाता है। अंडा देते समय जोर लगाने पर लिवर कैप्सूल फट जाता है। गर्मियों के महीनों में मुर्गियों की ऊर्जा की शारीरिक आवश्यकता कम होने के कारण मृत्यु दर में तेजी से वृद्धि होती है। इसके प्रबंधन के लिए फीड के सेवन पर सख्त नियंत्रण, कार्बोहाइड्रेट की जगह फैट्स (लिपिड) का उपयोग, और लिपोट्रोपिक एजेंटों (कोलीन, मेथियोनिन (Methionine), विटामिन B12) की खुराक देना आवश्यक है।
Structured Facts (Structured Facts)
Classification (Classification)
मेटाबॉलिक > गैर-संक्रामक (Non-Infectious)
Epidemiology (Epidemiology)
- भारत में प्रसार: केज लेयर सिस्टम में अत्यधिक प्रचलित
- गंभीरता: मध्यम से प्रमुख
- प्रभावित प्रजातियां: पोल्ट्री (पिंजरे में रहने वाली लेयर्स)
- प्रभावित आयु: पीक उत्पादन पार कर चुकी लेयर मुर्गियां (35 सप्ताह से अधिक की उम्र)
- संचरण (Transmission): गैर-संक्रामक
- मौसमी प्रभाव: गर्म ग्रीष्मकालीन महीनों में मृत्यु दर चरम पर होती है
- मृत्यु दर (Mortality): 3% से 5% (गर्मियों में 10% तक); पिंजरे में कुल मौतों का 74% तक कारण बनता है
- रुग्णता दर (Morbidity): उच्च (सब-क्लिनिकल मोटापा)
- आर्थिक महत्व (Economic Importance): गैर-संक्रामक मृत्यु दर का प्रमुख कारण
क्लिनिकल संकेत (Clinical Signs)
- शुरुआती/मध्यम चरण: पक्षियों का अधिक वजन होना, कलगी का पीला पड़ना
- गंभीर चरण: बिना किसी पूर्व चेतावनी संकेत के अचानक मृत्यु। प्रजनन, हृदय और लिवर प्रणाली को लक्षित करता है।
- पोस्टमार्टम निष्कर्ष: पेट की गुहा (एब्डोमिनल कैविटी) में जमे हुए खून के बड़े थक्के मिलना। लिवर का बड़ा, पीला-हल्का, नरम, चिकना और नाजुक होना तथा सबकैप्सुलर स्तर पर व्यापक रक्तस्राव। पेट में भारी मात्रा में चर्बी (फैट) का जमाव।
Diagnosis (Diagnosis)
- फील्ड डायग्नोसिस: भारी लेयर मुर्गियों की अचानक मृत्यु; लिवर से आंतरिक रक्तस्राव
- प्रयोगशाला परीक्षण: लिवर में लिपिड सामग्री का विश्लेषण; हिस्टोपैथोलॉजी में व्यापक फैटी इनफिल्ट्रेशन और ऊतकों की संरचना में टूट-फूट दिखना
- डिफरेन्शियल डायग्नोसिस: इंक्लूजन बॉडी हेपेटाइटिस, लिम्फॉइड ल्यूकोसिस
इलाज (Treatment)
- तत्काल कार्रवाई: ऊर्जा (कैलोरी) के सेवन को सीमित करें
- सहायक देखभाल: विटामिन थेरेपी
- दवाएं: लिपोट्रोपिक एजेंट (कोलीन, मेथियोनिन (Methionine), विटामिन B12), एल-ट्रिप्टोफैन
- विथड्रॉल अवधि: लागू नहीं
Prevention (Prevention)
- टीकाकरण: कोई नहीं
- बायोसिक्योरिटी (Biosecurity): लागू नहीं
- फार्म प्रबंधन: अधिक दाना (ओवरफीडिंग) देने से बचें; शुरुआती लेयर चरण (22-30 सप्ताह) में फीड इनटेक को नियंत्रित करें; आहार में कार्बोहाइड्रेट की जगह लिपिड का उपयोग करें; गर्म मौसम में ऊर्जा की मात्रा सीमित करें
Quantitative Data (Quantitative Data)
- Mortality Rate (Mortality Rate): 3% से 5% (गर्मियों में 10% तक)
- लक्षित उम्र (Target Age): > 35 सप्ताह
- Hepatic Lipid Content (Hepatic Lipid Content): शुष्क पदार्थ का 50% से 70%
- Housing System (Housing System): केज में होने वाली कुल मौतों का 74% तक, जबकि केज-फ्री सिस्टम में 0-5%
Relationships (Relationships)
- Vaccines (Vaccines): कोई नहीं
- Medicines (Medicines): कोलीन (Choline), मेथियोनिन (Methionine), विटामिन B12 (Vit B12)
- नस्ल की संवेदनशीलता (Breed Susceptibility): पिंजरे में रहने वाली लेयर मुर्गियां (Caged Layers)
- रोग बढ़ाने वाले कारक (Predisposing Factors): उच्च पर्यावरणीय तापमान, अत्यधिक कार्बोहाइड्रेट युक्त आहार
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